जीवन और प्रारंभिक परिचय
श्रीकांत वर्मा का जन्म 18 सितंबर 1931 को बिलासपुर, मध्य प्रदेश में हुआ। उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. की उपाधि प्राप्त की।
The Verma Family Office
18 September 2026 · New Delhi
A special celebration of his life, poetry and enduring literary legacy of Shrikant Verma.
Remembering the Poet
18 September 1931 — 25 May 1986
The 95th birth anniversary of Shrikant Verma is an occasion to remember his contribution to Hindi literature and celebrate the continuing relevance of his poetic voice.
The celebration brings together distinguished guests, poets, artists, critics and speakers for an evening dedicated to his work, memory and legacy.
साहित्य · पत्रकारिता · राजनीति · विरासत
"उनकी कविता में शब्द कम थे, पर अर्थ की परतें असाधारण रूप से गहरी थीं।"
श्रीकांत वर्मा का जन्म 18 सितंबर 1931 को बिलासपुर, मध्य प्रदेश में हुआ। उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. की उपाधि प्राप्त की।
श्रीकांत वर्मा के निधन के बाद उनकी साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को संस्थागत रूप से आगे बढ़ाने का दायित्व उनकी पत्नी स्व. वीणा वर्मा और उनके एकमात्र पुत्र श्री अभिषेक वर्मा ने संभाला। वर्ष 1987 में दोनों ने श्रीकांत वर्मा चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना की।
वर्ष 2025 में मूल साहित्यिक सम्मान को नया और अधिक व्यापक स्वरूप देते हुए उसका नाम 'श्रीकांत वर्मा शिखर सम्मान' रखा गया।
Chief Guest
Eminent Poet
अरुण कमल (जन्म 1954, नासरीगंज, रोहतास, बिहार) समकालीन हिंदी कविता के प्रमुख कवि, आलोचक, अनुवादक और संपादक हैं। उनकी कविताएँ आम आदमी के जीवन, संघर्ष और सामाजिक यथार्थ से गहराई से जुड़ी हुई हैं।
उनकी कविता में सामाजिक यथार्थ, श्रम, आम आदमी, राजनीतिक चेतना और जीवन के संघर्ष प्रमुख रूप से दिखाई देते हैं। उनके प्रमुख कविता-संग्रहों में अनेक महत्वपूर्ण रचनाएँ शामिल हैं।
उन्हें हिंदी साहित्य के क्षेत्र में अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया है।
Guest of Honour
Eminent Artist
प्रसिद्ध चित्रकार परमजीत सिंह का जन्म 1935 में अमृतसर, पंजाब में हुआ। उन्होंने दिल्ली पॉलिटेक्निक स्थित दिल्ली स्कूल ऑफ आर्ट से कला शिक्षा प्राप्त की।
1967 में नई दिल्ली की त्रिवेणी गैलरी में उनकी पहली एकल प्रदर्शनी आयोजित हुई। इसके बाद भारत और विदेशों की अनेक प्रतिष्ठित कला दीर्घाओं में उनकी एकल प्रदर्शनियाँ आयोजित हुईं।
1970 में उन्हें ललित कला अकादमी का राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ।
The Shrikant Verma Shikhar Samman
श्री अशोक वाजपेयी हिंदी के प्रतिष्ठित कवि, आलोचक, अनुवादक, संपादक एवं संस्कृति-चिंतक हैं। तीन दशकों से अधिक की साहित्यिक यात्रा में उन्होंने कविता एवं आलोचना सहित 30 से अधिक पुस्तकों का सृजन किया है। भारतीय साहित्य, कला और संस्कृति को देश-विदेश में प्रतिष्ठित करने तथा विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद स्थापित करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने साहित्य, संगीत, नृत्य, रंगमंच, दृश्य कला तथा लोक एवं जनजातीय कलाओं से जुड़े एक हजार से अधिक सांस्कृतिक आयोजनों का संयोजन किया है। उन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। पोलैंड एवं फ्रांस सरकारों ने भी उन्हें अपने विशिष्ट राष्ट्रीय सांस्कृतिक सम्मानों से अलंकृत किया है। भारत भवन, भोपाल की स्थापना में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। वे महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति तथा ललित कला अकादमी के अध्यक्ष भी रहे हैं। सेवानिवृत्त सिविल सेवक श्री अशोक वाजपेयी वर्तमान में रज़ा फाउंडेशन के प्रबंध न्यासी हैं
Speakers
Eminent literary voices coming together to celebrate the life, poetry and legacy of Shrikant Verma.
Musical Rendition
A special musical presentation bringing Shrikant Verma's poetry into dialogue with classical music and voice.
सुधा रघुरामन प्रसिद्ध कर्नाटक शास्त्रीय गायिका, संगीतकार एवं शिक्षिका हैं। उनका संगीत समृद्ध शास्त्रीय परंपरा और वर्षों की साधना से विकसित हुआ है। उन्होंने प्रारंभिक संगीत शिक्षा अपने पिता स्वर्गीय श्री ओ. एस. श्रीधर से प्राप्त की तथा अपने दादा प्रसिद्ध संगीत भूषणम् श्री ओ. वी. सुब्रमण्यम के मार्गदर्शन में अपनी गायन प्रतिभा को निखारा। उन्होंने वायलिन की शिक्षा भी स्वर्गीय श्री वी. जानकी रमन से प्राप्त की। सुधा रघुरामन ने भारत और विदेशों के अनेक प्रतिष्ठित संगीत समारोहों में प्रस्तुति दी है। इनमें तानसेन समारोह, कुमार गंधर्व संगीत समारोह, नादनीरजनम्, सेहर म्यूजिक फेस्टिवल, विष्णु दिगंबर जयंती समारोह तथा संगीत नाटक अकादमी के राष्ट्रीय संगीत समारोह प्रमुख हैं। उन्होंने अमेरिका, कनाडा, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और मॉरीशस सहित कई देशों में भारतीय शास्त्रीय संगीत का प्रतिनिधित्व किया है। एक कुशल संगीतकार के रूप में उन्होंने 500 से अधिक रिकॉर्डिंग की हैं और शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुतियों तथा कर्नाटक संगीत के लिए अनेक रचनाएँ तैयार की हैं। उनके संगीत को नई दिल्ली में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स के उद्घाटन समारोह के शास्त्रीय नृत्य खंड में भी शामिल किया गया था। संगीत शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान है। वे देश-विदेश में कार्यशालाओं और व्याख्यान प्रदर्शनों के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रशिक्षित करती हैं। वर्तमान में वे अशोका विश्वविद्यालय, सोनीपत में विजिटिंग फैकल्टी के रूप में कर्नाटक संगीत का शिक्षण करती हैं। उनके योगदान के लिए उन्हें दिल्ली युवा कलाकर सम्मान, चित्र कला सम्मान, उस्ताद बिस्मिल्लाह खान पुरस्कार (2011) तथा राष्ट्रीय कुमार गंधर्व सम्मान (2022) सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया है। वे ऑल इंडिया रेडियो की ‘ए’ ग्रेड कलाकार हैं और वर्ष 2003 से ICCR में वरिष्ठ संगीतकार के रूप में एम्पैनल्ड हैं
In Memory
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Looking Back
Moments from the 95th birth anniversary celebration — an evening of poetry, remembrance and distinguished company.
Moments Captured
In the Press
In His Own Words
A selection from Shrikant Verma's poetry, in his own voice.
Official Invitation
We invite you to an evening celebrating the memory, poetry and enduring legacy of Shrikant Verma.
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